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करषना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करषना क्रि॰ स॰ [सं॰ कर्षण]

१. खींचना । तानना । घसीटना । उ॰— (क) बारहिं बार अमरषत करषत करकैं परी सरीर ।— तुलसी (शब्द) । (ख) सुर तरु सुमन माल सूर बरषही ।— मनहुँ बलाक अपलि मनु करषहिं । —तुलसी (शब्द॰) । (ग) पद नख निरषि देवसरि हरषी । सुनि प्रभु वचन मोह मति करषी । — तुलसी (शब्द॰) ।

२. सोख लेना । सुखाना । जज्ब करना । उ॰— कोइ सिरजै पालै संहारै । कोइ बरषै करषै कोइ जारै । — रघुनाथ (शब्द) ।

३. बुलाना । निमं- त्रित करना । आकर्षण करना । समेटना । इकट्ठा करना । बटोरना । उ॰— सुनि बसुदेव देवकी हरषे । गोद लगाइ सकल सुख करषे —(शब्द॰) ।