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करसंपुट

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करसंपुट संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. हाथों की अंजलि ।

२. हाथ जोड़कर विनय करने की मुद्रा । उ॰— सिरु नाइ देव मनाय सब सन कहत करसंपुट किएँ । — मानस, २ । ३२६ ।