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करसी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करसी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ करीष]

१. उपले या कंड़े का टुकड़ा । उपलों का चूर । कंड़ो की भूसी या कुनाई कंड़े की कोर ।

२. कंड़ा । उपला । उ॰—सोइ सुकृती सुचि साँचो जाहि राम तुम रीझे । गनिका गीध बधिक हरिपुर गए लै करसी प्रयाग कब सीझे ।—(शब्द॰) । मुहा॰—करसी लेना=उपले या कंड़े की आग में शरीर को सिझाने का तप करना । उ॰— सिर करवत तन करसी लै लै बहु सीझे तेहि ईस । बहुत धूम घूँटत मैं देखे उतरु न देइ निरास ।—जायसी ग्रं॰ (गुप्त॰), १९६ ।