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कलपतरु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कलपतरु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कल्पतरु] दे॰ 'कल्पतरु' । उ॰—चाह आलबाल और अचाह के कलपतरु, कीरति मय्क प्रेमसागर अपार है ।—घनानंद॰, पृ॰ १३१ ।