कलपतरु
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कलपतरु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कल्पतरु] दे॰ 'कल्पतरु' । उ॰—चाह आलबाल और अचाह के कलपतरु, कीरति मय्क प्रेमसागर अपार है ।—घनानंद॰, पृ॰ १३१ ।
कलपतरु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कल्पतरु] दे॰ 'कल्पतरु' । उ॰—चाह आलबाल और अचाह के कलपतरु, कीरति मय्क प्रेमसागर अपार है ।—घनानंद॰, पृ॰ १३१ ।