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कलापी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कलापी ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कलापिन्] [स्त्री॰ कलापिनी]

१. मोर । उ॰—पैड़े परे पापा ये कलापी निस द्योस ज्यौही, चातक । घातक त्यौं ही तू हू कान फोरि लै ।—घनानंद, पृ॰ ८७ ।

२. कोकिल ।

३. बरगद का पेड़ ।

४. वैशंपायन का एक शिष्य ।

५. मयूर के नृत्य का समय (जब मयूर अपनी पूँछ के पंखों को फैलाता है) (को॰) ।

कलापी ^२ वि॰

१. तूणीर बाँधे हुए । तरकशबंद ।

२. कलाप व्याकरण पढ़ा हुआ ।

३. झुंड में रहनेवाला ।

४. पूँछ या दूम फैलाने— वाला (मोर) (को॰) ।