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कल्पसूत्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कल्पसूत्र संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह सूत्रग्रंथ जिसमें यज्ञादि कर्मों या गृहय कर्मों का विधान लिखा हो । विशेष— ऐसे ग्रंथ वेदों की प्रत्येक शाखा के लिये पृथक् पृथक् ऋषियों के बनाए हुए हैं और विषयभेद से इनके दो भेद हैं— श्रौत और गृह्य । वे सूत्रगंथ जिनमें दर्शपौर्ण मास से लेकर अश्वामेधादि यज्ञों तक की विधि का विधान है, श्रौतसूत्र कहलाते हैं; तथा जिनमें गृहस्थों के पंचमहायज्ञादि कृत्यों और गर्भाधानादि संस्कारों की विधि लिखी है, वे गृह्मसूत्र कहलाते हैं ।