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कल्लाना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कल्लाना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ कड् या कल् = असंज्ञा होना]

१. शरीर में चमड़े के ऊपर हि ऊपर कुछ जलन लिए हुए एक प्रकार की पीड़ा होना, जैसे थप्पाड़ लगने से ।

२. असहय होना । दुःख- दायी होना । मुहा॰— जी कल्लाना =चित्त को दुःख पहुँचना । उ॰— आज वे बिना खाए गए हैं, वह भला काहे को खाने पीने को पूछेगी । जैसा हमारा जी कल्लाता है, वैसा ही उसका भी थोड़े कल्लायगा— सौ अजान॰ (शब्द॰) ।

कल्लाना ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ कल्ला]

१. कल्ले निकलना । पल्लवित होना ।

२. विकसित होन । समृद्ध होना । उ॰— वे पुराने परिवार वृक्ष की कलमों के रूप में नई भूमि पा, नए परिवार की लहलहाती शाखा के रूप में कल्ला उठे ।— भस्मावृत॰, पृ॰ ९ ।