सामग्री पर जाएँ

कहँ

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

कहँ ^१पु प्रत्य॰ [सं॰ कक्ष, प्रा॰ कच्छ] के लिये । उ॰—(क) राम पयादेहि पाँव सिधाये । हम कहँ रथ गज बाजि बनाए ।— तुलसी (शब्द॰) । (ख) तुम कहँ तौ न दीन बनबासू । करहु जो कहहिं ससुर गुरु सासू ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) गयो कचहरी को वह गृह कहँ जहँ मुनसी गन ।—प्रेमधन॰ भा॰१, पृ॰ १४ । विशेष—अवधी बोली में यह द्वितीया और चतुर्थी का चिहन है३ ।

कहँ ^३ पु क्रि॰ वि॰ [हिं॰ कहाँ] दे॰ 'कहाँ' । यौ॰—कहँ लगि = कहाँ तक । उ॰—कहँ लगि सहिय रहिय मन मारे । नाथ साथ धनु हाथ हमारे ।—तुलसी (शब्द॰) ।

कहँ ^१ पु † क्रि॰ वि॰ [हिं॰ कहुँ] दे॰ 'कहूँ' ।