कहरुवा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कहरुवा संज्ञा सं॰ [कहरुबा]
१. बरमा की खानों से निकला हुआ एक अकार का गोंद जैसा पदार्थ । वीशेष—यह रंग में पीला होता है और औषध में काम आता है । चीन देश में इसको पिघलाकर माला की गुरियाँ, मुँहनाल इत्यादि वस्तुएँ बनाते हैं । इसकी वारनिश भी बनती है । इसे कपड़े आदि पर रगड़कर यदि घास या तिनके के पास रखें तो उसे चुंबक की तरह पकड़ लेता है ।
२. एक बड़ा सदाबहार वृक्ष जिसका गोंद राल या धूप कहलाता है । विशेष—यह पेड़ पशि्चमी घाट की पहाड़ियों में बहुत होता है । इसे सफेद डामर भी कहते हैं । पेड़ से पोंछकर राल निकालते हैं । ताड़पीन के तेल में यह अच्छी तरह घुल जाता है और वारनिश के काम में आता है । इसकी माला भी बनती है । उत्तरी भारत में स्त्रियाँ इसे तेल में पकाकर टिकली चपकाने का गोंद बनाती हैं । अर्क बनाने में भी कहीं कहीं इसका उपयोग होता है ।