काँ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]काँ ^१पु प्रत्य॰ [हिं॰] दे॰ 'को' । उ॰—साईँ नावों तोहि का माथ ।—जग॰ बानी, पृ॰ ३३ ।
काँ ^२पु † क्रि॰ वि॰ [हिं॰ कहाँ का संक्षिप्त रूप] दे॰ 'कहाँ' । उ॰— गया था काँ तेरा तब होश दाई, जो ऐसे मस्त दीवाने को लाई ।—दक्खिनी॰, पृ॰ २५१ ।
काँ क † संज्ञा पुं॰ [सं॰ कङ्कु] कँगनी नाम का अनाज ।
काँ क ^२ † संज्ञा पुं॰ [सं॰ कङ्क]
१. सफेद चील । कंक ।
२. गीध ।
काँ कड़ ^१ पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्कर, हिं॰ कंकड़] दे॰ 'ककड़' । उ॰— कासली षडेलो भूमि काँकड़ पैगाम ।—शिखर॰, पृ॰ ३३ ।
काँ कर पु † संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्कर] [स्त्री॰ अल्प॰ काँकहरी] कंकड़ । उ॰—(क) काँकर पाथर जोरिके मसजिद लई चुनाय । ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे क्या बहिरा हुआ खुदाय?—कबीर (शब्द॰) (ख) कुस कंटक मग काँकर नाना । चलब पियादे बिनु पद- आना ।—तुलसी (शब्द॰) ।