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काँई

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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काँई ^१ † अव्य॰ [सं॰ किम्] क्यों । उ॰—माई म्हाको स्वप्त में बरनी गोपाल । राती पीती चूनरि पहिरी मेहंदी पाणि रसाल । काँईँ और की भरो भाँवरै म्हाको जग जंजाल । मीरा प्रभु गिरधरन लला सों करी सगाई हाल ।—मीरा (शब्द॰) ।

काँई ^२ † सर्व॰ [हिं॰ काहि] किसे । किसको ।