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काँकाँ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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काँकाँ संज्ञा पुं॰ [अनु॰] कोए की बोली । उ॰—घरी एक सज्जन कुटुँब मिलि बैठे रुदन कराहीं । जैसे काग के मुए काँ काँ करि उड़ि जाहिं ।—सूर (शब्द॰) ।