काँठा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]काँठा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कण्ठ ]
१. गला । उ॰ — बाँधा कंठ परा जरि काँठा । विरह का जरा जाइ कहँ नाँठा । — जायसी ग्रं॰ (गुप्त) , पृ॰ २७० ।
२. वह लाल नीली रेखा जो तोते के गंले के किनारे मंडलाकार निकलती है । उ॰— हीरामन हौं तेहीके परेवा । काँठा फूट करत तेहि सेवा । — जायसी (शब्द॰) ।
३. किनारा ।तट । उ॰— (क) भाइ विभीषन जाइ मिल्यो प्रभु आइ परेसुनि सायर काँठे । — तुलसी ( शब्द॰) । (ख) दरिया का काँठा । — (लश॰),
४. पार्श्व । बगल ।
काँठा ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ काष्ठ ] जुलाहों का लकडी का एक बालिश्त लंबा पतला छड़ । विशेष — इसमें जुलाहे बाना बुनने के लिये रेशम लपेटते हैं । यदी ताना बादले का होता है तो काँठे ही ही बुनते भी हैं ।