काँन
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]काँन ^१ पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कृष्ण, प्रा॰ कण्ह , पु कान्ह] दे॰ 'कान्ह' । उ॰ — अलक लोक बज्जत विषम गन गंध्रव्व विमांन । सुरपति मति भूल्यो रहसि रास रचित व्रज काँन । — पृ॰ रा॰, २ ।३४१ ।
काँन ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्ण, प्रा॰ कष्ण] दे॰ 'कान' । उ॰— 'बैजू' बनवारी बंसी अधर धरि बृंदावन चंद, बस किए सुनतहि काँनन । —पोद्दार अभि॰ ग्रं॰, पृ॰ १५१ ।