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काँवरि

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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काँवरि † संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ काँवर ] दे॰ 'काँवर' । उ॰ — (क) श्रवन श्रवन करि ररि मुई माता काँवरि लागि । तुम बिनु पानि न पावइ दशरथ लावै आगि । — जायसी (शब्द॰) । (ख) सहस शकट भरि कमल चलाए । अपनी समसरि और गोप जो तिनको साथ पठाए । और बहुत काँवरि माखन दधि अहिरन काँधै जोरी । बहुत बिनती मोरी कहिये और धरे जलजामल तोरी ।— सुर (शब्द॰) । (ग) कोटिन काँवरि चले कहारा । विविध वस्तु को बरनइ पारा । — तुलसी (शब्द॰) ।