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कांतार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कांतार संज्ञा पुं॰ [सं॰ कान्तार]

१. भयानक स्थान । विशेष—बौद्ध ग्रंथों में पाँच प्रकार के कांतार लिखे है—चौर कांतार, व्याल कांतार, अमानुष, निरुदक कांतार और अल्पभक्ष्य कांतार ।

२. दुर्भिद्य और गहन वन । घना जंगल ।

३. एक प्रकार की ईख । केतार ।

४. बाँस ।

५. छेद । दरार ।

६. बुरा रास्ता । दुर्दम रास्ता (को॰) ।

७. लक्षण (को॰) ।

८. कमल (को॰) ।