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काकक्षिगोलक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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काकक्षिगोलक न्याय संज्ञा पु॰ [सं॰] एक शब्द या वाक्य को उलट फेरकर दो भिन्न भिन्न अर्थों में लगाना । विशेष—लोगों का विश्वास है कि कौए को एक ही आँख होती है जिसे वह इच्छानुसार दाहिने या बाएँ गोलक में लाकर अपना काम चलाता है । इसीलिये संस्कृत में कौए को एकाक्ष भी कहते हैं । जिस तरह एक आँख को कौआ कभी दाहिनी और कभी बाई ओर ले जाता है, उसी तरह किसी शब्द या वाक्य का यथेच्छ सीधा उलटा अर्थ करने को काकक्षिगोलक न्याय कहते हैं ।