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काकड़ासींगी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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काकड़ासींगी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कर्कटश्रृङ्गी] हिमालय के उत्तर पश्चिम भाग में काँकड़ा नामक पेड़ में लगा हुआ एक प्रकार का टेढ़ा पोला बाँदा जिसका प्रयोग औषधौ में होता है । विशेष—यह रँगने और चमड़ा सिझाने के काम में भी आता है । लोहे के चूर के साथ मिलकर यह काला नीला रंग पकड़ना है । वैद्यक में इसे गरम और भारी मानते हैं । खाने में इसका स्वाद कसैला होता है । वात, कफ, श्वास, खाँसी, ज्वर, अतिसार और अरुचि आदि रोंगों में इसे देते हैं । अरकोल या लाखर नामक वृक्ष का बाँदा भी काकड़ासींगी नाम से बिकता हैं ।