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काकपद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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काकपद संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. वह चिह्न जो छूटे हुए शब्द के स्थान को जताने के लिये पंक्ति के नीचे बनाया जाता है और वह छूटा हुआ शब्द ऊपर लिख दिया जाता है ।

२. हीरे का एक दोष । छपहलू या अठपहलू हीरे में यदि यह दोष हो तो पहननेवाले के लिये हानिकारक समझा जाता है ।

३. कौए के पैर का परिमाण । स्मृति में यह एक शिखा का परिमाण माना गया है ।

४. चर्मच्छेदन ।

५. रतिविषयक एक आसन या बंध (को॰) ।