काकोली
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]काकोली संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक ओषधि । विशेष—यह एक प्रकार की जड़ या कंद है जो सतावर की तरह होती है, पर आजकल मिलती नहीं । इसका एक भेद क्षीरका- कोली भी है । वैद्यक में यह वीर्यवर्धक और क्षीरवर्द्धक मानी गई है । पर्या॰—शीतपाकी । पपस्या । क्षीरा । बीरा । घीरा । शुल्का । मेदुरा । जीवंती । पयस्विनी ।