कागर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कागर पु सज्ञा पुं॰ [अ॰ कागज]
१. कागज । उ॰—(क) तुम्हरे देश कागर मसि खुटि । प्यास अरू नीद गई सब हरि के बिना बिरह तन टूटी ।—सूर (शब्द॰) । (ख) कबित बिवेक एक नहिं मोरें । सत्य कहों लिखि कागर कोरे ।—मानस, १ ।९ ।
२. पंख । पर । उ॰—(क) कीर के कागर ज्यों नृपचीर विभूषन उप्पम अंगनि पाई ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) कागर कीर ज्यों भूषन चीर सरीर लस्यो तज्यों नीर काई ।—तुलसी (शब्द॰) ।