सामग्री पर जाएँ

कान्यकुब्ज

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

कान्यकुब्ज संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. प्राचीन समय का एक प्रांत जो वर्तमान समय के कन्नोज के आसपास था । विशेष—इस प्रदेश के संबंध में रामायण में लिखा है कि राजर्षि कुशनाभ को धृताची नाम की अप्सरा से१००कन्याएँ हुईं । उन कन्याओं के रुप को देख वायु उन पर मोहित हो गया । कन्याओं ने जब वायु की बात अस्वीकार की, और कहा कि पिता की आज्ञा के बिना हम लोग किसी को स्वीकार नहीं कर सकती, तब वायु देवता ने कुपित होकर उन्हें कुबडी कर दिया । पिता कन्याओं पर बहुत प्रसन्न हुए औऱ उन्हें कांपिल्ल नगर के राजा ब्रम्हादत्त (चूलीय ऋषि के पुत्र) को ब्याह दिया, जिनके स्पर्श से उनका कुबडापन जाता रहा । ह्मेनसाँग ने अपने विवरण में यह कथा और ही प्रकार से लिखी है । उसने सौ कन्याओं को कुसुमपुर के राजा ब्रह्मदत्त की कन्याएँ माना है ओर लिखा है कि महावृक्ष ऋषि ने मोहित होकर उन कन्याओं में से एक को ब्रह्मदत्त से माँगा । राजा सबसे छोटी कन्या को लेकर ऋषि के आश्रम पर गए । ऋषि ने कुपीत होकर कहा—सबसे छोटी कन्या क्यों ? राजा ने डरते डरते कहा कि औऱ कोई कन्या राजी नहीं हुई । ऋषि ने शाप दिया कि तुम्हारी और सब कन्याएँ कुबडी हो जायँ । इन्हिं कुबडी कन्याओं के आख्यान से इस प्रदेश का नाम कान्यकुब्ज पडा ।

२. कान्यकुब्ज देश का निवासी ।

३. कान्यकुब्ज देश का ब्राह्मण कनौजिया ।