कान्हर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कान्हर † ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्ण] कोल्हू के कातर के छोर पर लगी हुई बेडीं औऱ टेढी लकडी । विशेष— यह दोनों ओर निकली होती है और कोल्हू की कमर से लगकर चारों ओर घूमती है ।
कान्हर पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कृष्ण, प्रा॰ कण्ह] श्रीकृष्ण जी । उ॰— देखी कान्हर की निठराई । कबहूँ पाति हु न पठाई ।—(शब्द॰) ।