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कारणशवीर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कारणशवीर संज्ञा पुं॰ [सं॰] वेदांत सें अणुवाद के अनुसार सुषुप्त अवस्था का कल्पित शरीर । विशेष—इसमें इंद्रियों के बिषयव्यापार का अभाव रहना है पर अहंकार आदि का संस्कार मात्र रह जाता है, जिससे जीवात्मा कैवल सुख ही सुख का अनुभव करता है । यह शरीर वास्तव में अविद्या ही है । इसे आनदमय कोश भी कहते हैं ।