कारनी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कारनी ^१ वि॰ [ सं॰ कारण या करण = कान ] प्रेरक । करनेवाला । उ॰ — जो पै चेराई राम की करतो न लजातो । तो तूँ दाम कुदाम ज्यों कर कर न बिकातो । — राम सोहातो तोहिं जौ तू सबहि सोहातो । काल कर्म कुल कारनी कोऊ न कोहातो । — तुलसी (शब्द॰) ।
कारनी ^२ संज्ञा पुं॰ [ सं॰ कारीनि] भेद करानेवाला । भेदक । जैसे, उसके साथ यहीं से कारनी लगे और राहु से कान भरकर उन्होंने उसकी मति पलट दी ।