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कारुँ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कारुँ ^२ संज्ञा पुं॰ [अ॰ कारूँ ] हजरत मूसा का चचेरा भाई जो बड़ा धनी था, पर खैरात नहीं करता था । कहा जाता है ४० खच्चरों पर उसके खजानों की कुंजियाँ चलती थीं । कंजूसी के कारण अब उसके नाम का अर्थ ही कंजूस पड़ गया है । उ॰—दो चार टके ही पै कभी रात गवाँ दूँ । कारूँ का खजाना कभी इनआम है मेरा ।—भारतेंदु, ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ७९० । यौ॰—कारूँ का खजाना = असीम धन । अनंत संपत्ति । कुबेर की सी संपत्ति ।