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कालक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कालक संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. तैंतीस प्रकार के केतुओं में से एक केतु का नाम ।

२. आँख की पुतली ।

३. बीजगणित में द्वितीय अव्यक्त राशि ।

४. अलगर्द नामक पानी का साँप ।

५. एक देशविशेष । विशेष—यह महाभाष्यकार पतंजलि के समय में आर्यावर्त की पूर्वी सीमा माना जाता था ।

६. यकृत ।

७. एक राक्षस का नाम जो कालक नामक स्त्री से उत्पन्न कश्यप का पुत्र था ।

८. एक प्रकार का अन्न (को॰) ।