कालरात्रि
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कालरात्रि संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]
१. अंधेरी और भयावनी रात ।
२. ब्रह्मा की रात्रि जिसमें सारी सृष्टि प्रलय को प्राप्त रहती है, केवल नारायण ही रहते हैं । प्रलय की रात ।
३. मृत्यु की रात्रि ।
४. ज्योतिष में रात्रि का वह भाग जिसमें किसी कार्य का आरंभ करना निषिद्ध समझा जाता है । विशेष—इसके लिये रात के दंडो के आठ सम भाग करते हैं । फिर बारों के हिसाब से एक एक दिन के लिये एक एक भाग वर्जित हैं । जैसे, रविवार को रात का छठा भाग अर्थात २० दंड के बाद के ४ दंड, सोमवार को चौथा भाग अर्थात १२ दंड के बाद के ४ दंड, मंगलवार को दूसरा भाग अर्थात ४ दंड के बाद के ४ दंड, बुधवार को सातवाँ भाग अर्थात २४ दंड के बादके ४ दंड, बृहस्पतिवार को पाँचवाँ भाग अर्थात १६ दंड के बा द के ४ दंड, शुक्रवार को तीसरा भाग अर्थात ८ दंड के बाद के ४ दंड और शनिवार को पहला और आठवाँ भाग अर्थात पहले ४ दंड और अंतिम ४ दंड । यह हिसाब ३२ दंड की रात के लिये है । यदि रात्रि इससे कम या अधिक हो, तो उन दंडों के आठ सम भाग करके उसी क्रम से हिसाब बैठा लेना चाहिए ।
५. दीवाली की अमावस्या ।
६. दुर्गा की एक मूर्ति ।
७. यमराज की बहन जो सब प्राणियों का नाश करती है ।
८. मनुष्य की आयु में वह रात जो सतहत्तरवें वर्ष के सातवें महीने के सातवें दिन पड़ती है और जिसके बाद वह नित्य कर्म आदि से मुक्त समझा जाता है ।