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कालिख

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कालिख संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कालिका] वह काली महीन बुकनी जो आग या दीपक के धुँए के जमने से वस्तुओं में लग जाती है । कलौंछ । स्याही । क्रि॰ प्र॰—लगना ।—जमना । मुहा॰—मुँह में कालिख लगना=बदनामी और कलंक के के कारण मुंह दिखलाने लायैक न रहना । कलंक लगना । मुँह में कालिख लगना = (१) कलंक लगने का कारण होना । बदनामी का कारण होना । जैसे,—उसने ऐसा करके हमारे मुहँ भी कालिख लगाई । (२) कलंत लगाना । दोषी ठहराना ।