सामग्री पर जाएँ

काव्यालिंग

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

काव्यालिंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ काव्यलिंग] एक अर्थालंकार जिसमें किसी कही हुई बात का कारण आने वाले वाक्य के युक्तिपूर्ण अर्थ द्वारा या पद के अर्थ द्वारा दिखाया जाय । जैसे—(क) (वाक्यर्थ द्वारा) कनक कनक तेसै गुनी, मादकता अधिकाय । वह खाए बौरात है, यह पाए बौराय । यहाँ पहले चरण में सोने की जो अधिक मादकता बतलाई गई, उसका कारण दूसरे चरण के 'वह पाए बौराय' इस वाक्य द्वारा दिया गया । (ख) (पदार्थता द्वारा) जनि उपाय और करौ यहै राखु निरधार । हिय वियोग तम टारिहैं बिधुबदनी वह नार । इस दोहे में वियोगरूप तम दूर होने का कारण 'बिधुबदनी' इस एक पद के अर्थ द्वारा कहा गया ।