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कासनी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कासनी संज्ञा स्त्री॰ [फां॰]

१. पौधा जो हाथ डेंड हाथ ऊँचा होता है और देखने में बहुत हरा भरा जान पड़ता है । विशेष—इसकी, पत्तियाँ पालकी की छोटी पत्तियों की तरह होती है, डंठलों में तीन तीन चार चार अंगुल पर गाँठे होती है, जिसमें नीले फूलों के गुच्छे लगते हैं । फूलों के झड़ जाने पर उनके नीचे मटमैले रंग के छोटे छोटे बीज पड़ते है । इस पौधे की जड़, डंठल और बीज सब दवा के काम में आते हैं । हकीमों के मत में कासनी का बीज द्रावक शीतल और भेदक है तथा उसकी जड़ गर्म, ज्वरनाशक और बलवर्धक है । डाक्टरों के अनुसार इसका बीज रजःस्रावक, बलकारक और शीतल तथा इसका चूर्ण ज्वरनाशक है । कासनी बगीचों में बोई जाती है । हिंदुस्थान में अच्छी कासनी पंजाब के उत्तरी भागों में तथा कश्मीर में होती है । पर यूरोप और साइबेरिया आदि की कासनी औषध के लिये बहुत उत्तम समझी जाती है । यूरोप में लोग कासनी का साग खाते हैं और उसकी जड़ को कहवे के साथ मिलाकर पीते हैं । जड़से कहीं कहीं एक प्रकार की तेज शराब बी निकालते हैं ।

२. कासनी का बीज ।

३. एक प्रकार का नीला रंग जो कासनी के फूल के रंग के समान होता है । विशेष—यह रंग चढ़ाने के लिये कपड़े को पहले शराब में फिर नील में और फिर खटाई में डूबाते हैं ।

४. नीलें रंग का कबूतर ।