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किब्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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किब्र संज्ञा पुं॰ [अ॰]

१. महत्व ।

२. बड़प्पन । उ॰—सो कबीर उसे कहते हैं जिसमें किब्र (गौरव) हौवै—कबीर मं॰, पृ॰ ४२० ।

२. अभिमान । गर्व । उ॰—होर इबादत में काहिल बख्शाता है होर किब्र व कीना, बुग्ज व हिर्स, हवा व बखीली व तुंबी व शाहबत यो तमाम फेल नफश अंम्मारा के हैं ।—दक्खिनी॰, पृ॰ ३९६ ।