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किलकार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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किलकार संज्ञा स्त्री॰ [हि॰ किलक] बह गंभीर और अस्पष्ट स्वर जिसे लोग आनंद और उत्साह के समय मुँह से निकालते हैं । हर्षध्वनि । उ॰—कलरव करते किलकार रार ये मौन मूक तुण तरुदल पर । तकते अपलक निश्चल सोए उड़ उड़ पँख- ड़ियों पर सुंदर ।—युग॰, पृ॰ ९० ।