किष्णा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]किष्णा पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुष्ण] दे॰ 'कृष्णा' । उ॰— किष्णा विरह गोपिका भई व्याकुल सु विकल मन ।—पृ॰ रा॰, २ । ३४८ ।
किष्णा पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुष्ण] दे॰ 'कृष्णा' । उ॰— किष्णा विरह गोपिका भई व्याकुल सु विकल मन ।—पृ॰ रा॰, २ । ३४८ ।