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कि॰

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कि॰ प्र॰—लगाना ।

कि॰ प्र॰—आना ।—उठना । मुहा॰—लहर लेना = समुद्र के किनारे लहर में स्नान करना ।

२. उमंग । वेग । जोश । उठान । जैसे,—आनद की लहर । उ॰—फूलो धेनु, फूले धाम, फूली गोपी अंग अंग फिर तरुवर आनँद लहर के ।—सूर (शब्द॰) ।

३. मन को मौज । मन में आपसे आप उठी हुई प्रेरणा । मन में वेग के साथ उत्पन्न भावना । जैसे,—उनके मन की लहर है; आज इधर ही निकल आए ।

४. शरीर के अंदर के किसी उपद्रव (जैसे, बेहोशी, पीड़ा आदि) का वेग जो कुछ अंतर पर रह रहकर उत्पन्न हो । झोंका । जैसे,—साँप के काटने पर लहर आती है । उ॰—(क) सुनि के राजा गा मुरझाई । जानौ लहरि सुरुज कै आई ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) सूर सुरति तनु की कछु आई उतरत लहरि के ।—सूर (शब्द॰) । मुहा॰—लहर देना या मारना = रह रहकर किसी प्रकार की पीड़ा उठना । साँप काटने की लहर = साँप काटे आदमी को वह अवस्था जिसमें बेहोशी के बीच बीच में वह जाग उठता है । उ॰—लाओ गुनी गोविंद की बाढ़ी है अति लहरि ।—सूर (शब्द॰) ।

५. आनंद की उमंग । हर्ष या प्रसन्नता का वेग । मजा । मौज । जैसे,—वहाँ चलो; बड़ी लहर आवेगी । यौ॰—लहर बहर = सब प्रकार का आनंद और सुख । मुहा॰—लहर आना = आनंद आना । लहर लेना या मारना = आनंद भोगना । मौज करना ।

६. आवाज की र्गूंज । स्वर का कंप जो वायु में उत्पन्न होता है ।

७. वक्र गति । इधर उधर मुड़ती हुई टेढ़ी चाल । जैसे,— वह लहरें मारता चलता है । मुहा॰—लहर मारना या देना = सिधा न जाकर इधर उधर मुड़ना ।

८. बराबर इधर उधर मुड़ती या टेढ़ी होती हुई जानेवाली रेखा । चलते सर्प को सी कुटिल रेखा ।

९. †कसीदे की धारी ।

१०. हवा का झोंका ।

११. किसी प्रकार की गध से भरी हुई हवा का झोंका । महक । लपट । उ॰—खुलि रही खूब खुसबोयन की लहरि तैसे सीतल समीर डालै तनिकऊ न डोली मैं ।— निहाल (शब्द॰) ।