कीचम
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कीचम पु वि॰ [हिं॰ कीच+ प्रा॰ म (प्रत्य॰)] गंदी । मलिन । उ॰—सुंदर सदगुरु ब्रह्म मय परि शिष कीचम दृष्टि । सूधी वोर न देखई देषै दर्पन पृष्टि ।—सुंदर ग्रं॰, भा॰१, पृ॰ ६७२ ।
कीचम पु वि॰ [हिं॰ कीच+ प्रा॰ म (प्रत्य॰)] गंदी । मलिन । उ॰—सुंदर सदगुरु ब्रह्म मय परि शिष कीचम दृष्टि । सूधी वोर न देखई देषै दर्पन पृष्टि ।—सुंदर ग्रं॰, भा॰१, पृ॰ ६७२ ।