कीटभृंग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कीटभृंग संज्ञा पुं॰ [सं॰ कीटभृङ्न] एक न्याय, जिसका प्रयोग उस समय होता है जब दो या कई वस्तुएँ बिलकुल एक रूप हो जाती हैं । उ॰—भइ गति कीटभृंग की नाई । जहँ तहँ मैं देखे रघुराई ।—तुलसी (शब्द॰) । विशेष—भृंगया गुहांजनी (जिसे बलमी और भँवरी भी कहते हैं) के विषय में यह प्रवाद प्रसिद्ध है कि वह दूसरे कीड़ों को अपनी बिंल में पकड़ ले जाती है और उन्हें अपने रूप का कर लेती हैं ।