कुँड़रा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुँड़रा संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुण्डल] [स्त्री॰ अल्पा॰ कुँडरी ]
१. मंडलाकार खींची हुई रेखा (क) जिसके भीतर खडे़ होकर लोग शपथ करते थे । (ख) जिसके भीतर किसी वस्तु को रखकर उसे मंत्र आदि से रक्षित करते थे, और (ग) जिसके भीतर भोजन रखकर उसे छूत से बचाते हैं ।
२. कई फेरे दैकर मंडलाकार लपेटी हुई रस्सी या कपड़ा जिसे सिर के ऊपर रखकर बोझ या घड़ा आदि उठाते हैं । इंडुवा । गेंडरी ।