कुकनू
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुकनू संज्ञा पुं॰ [यू॰] एक पक्षी, जिसके बारे में यह प्रसिद्ध है कि वह अकेला नर ही पैदा होता है । उ॰— कुकनू पंख जइस सर साजा । तस सर सा़जि जरे चह राजा ।—जायसी (शब्द॰) । विशेष — यह गाने में बहुत निपुण समझा जाता है । कहते हैं , इसकी चोच में बहुत से छिद्र हाते है, जिनमें से तरह तरह के स्वर निकलते हैं । इसका गान ऐसा विलक्षण होता है कि उसमें से आग निकलती है । जब यह पूर्ण युवा होता है, तब बसंत ऋतु में लकड़ियां संग्रह कर उसपर बैठ कर गाता है । इसके गाने से आग निकलती है और यह जलकर भस्म हो जाता है । जब वरसात आती है, तब पाना पड़ने से इसकी राख में से अंडा निकल आता है जिससे कुछ दिनो में एक दूसरा पक्षी निकलता है । इसे फारसी में 'आतशजन' कहते है ।