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कुकुभ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कुकुभ संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. एक राग का नाम । वि॰ दे॰ 'ककुभ'

२. एक मात्रिक छंद जिसके प्रत्येक चरण में १६ और १४ के विश्राम से ३० मात्राएँ होती हैं । छंद के पादांत में दो गुरुका होना आवश्यक है । जैसे, — गिरिधर मोहन बंशीधारी, राधापति हरि बलबीरा । ब्रजबासी संतन हितकारी, शूरा हलधर रणधीरा । सुंदर रामप्रताप मुरारी, जसुदा को पीछो छीरा । चक्रपाणि कह सुनौ बिहारी, चितवन से हर मम पीरा ।