कुञ्जा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुंजा ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ क्रौ़ञ्ज; प्रा॰ कुँच कोंच्च; राज॰ कूंज, कुँफ, कूंफ] क्रौंच पक्षी । उ॰— अंबर कुँजां कुरलियाँ गरजि भरे सब तल । जिनि पैं गोविद बीछुटे, तिनके कौण हवाल ।— कबीर ग्रं॰, पृ॰ ७ ।
कुंजा ^२— † संज्ञा पुं॰ [अ॰ कूजा] पुरवा । चुक्काड़ । उ॰— प्याली गंगा जली टोकनी गंगा सागर । कुंजा जंबूड़बा और ताँबे की गागर ।— सूदन (शब्द॰) ।
कुंजा ^३ † संज्ञा स्त्री॰ [ सं॰ कञ्चुक] कोंचुल । निर्मोंक । उ॰—नानक देह तजै ज्यौ कुंजै मनु निरबान समाना ।— प्राण॰, पृ॰ ६६ ।