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कुठाँव

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कुठाँव पु † संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कु + हिं॰ ठाँव] बुरी ठौर । बुरी जगह । उ॰—यह सब कलियुग को परभाव । जो नृप को मन गयो कुठाँव ।—सूर (शब्द॰) । मुहा॰—कुठाँव मारना = (१) मर्म स्थान पर मारना, अथवा ऐसे स्थान पर मारना जहाँ बहुत कष्ट या दुर्गति हो । (२) घोर आघात पहुँचाना । बुरी मौत मारना । उ॰—धरम धुरंधर धीर धरि नयन उघारे राव । सिर धुनि लीन्ह उसास असि मारेसि मोहि कुठाँव ।—तुलसी (शब्द॰) ।