कुण्ड़लिया
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुंड़लिया संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कुण्ड़लिका, प्रा॰ कुँड़लिआ] एक मात्रिक छंद जो एक दोहे और रोले के योग से इस प्रकार बनता चहै कि दोह के अतिम चरण के कुछ शब्द रोले के आदि में अविकल आते हैं । जैसे,— गुण के ग्राहक सहस नर बिनु गुण लहै न कोय । जैसे कागा कोकिला शब्द सुनै सब कोय । शब्द सुनै सब कोय कोकिला सर्ब सुहावन । दोऊ के एक रंग े काग सब भए अपावन । कह गिरिधर कविराय सुनो हो ठाकुर मन के । बिनु गुण लहै न कोइ सहस गुण गाहक नर के ।