कुतवा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुतवा संज्ञा पु॰ [अ॰ खुतबह्]
१. वह धार्मिक व्याख्यान जिसे इमाम जुमा (शुक्रवार) की या ईद की नमाज के बाद देता है और जिसमें तत्कालीन खलीफा या शाह की प्रशंसा रहती है । दे॰ 'खुतवा' । उ॰—कुतवा पढयो छत्र सिरतान । बैठि तखत फेरी निज आन ।—अर्ध॰, पृ॰ ४ ।