कुन्दी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुंदी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ कुंदा]
१. धुले या रँगे हुए कपड़ों की तह करके उनकी सिकुड़न और रुखाई दूर करने तथा तह जमाने के लिये उसे लकड़ी की मोगरी से कूटने की क्रिया । विशेष—इस देश में इस्तरी की प्रथा का प्रचार होने से पहले धोबी इसी का व्यवहार करते थे । आजकल भी कमखाब आदि पर कुंदी ही की जाती है ।
२. खूब मारना । ठोंकना । पीटना । क्रि॰ प्र॰—करना । यौ॰—कुंदीगर ।
कुंदी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कुभ्भीं]
१. काय फल ।
२. कुंभी जलकुंभी ।
३. कुंभ नामक पेड़
५. एक प्रकार का बड़ा वृक्ष । अरजम । विशेष—यह बहुत जल्दी बढ़ता और प्रायः सारे भारत में पाया जाता है । इसकी छाल से चमड़ा सिझाया जाता है और रेशों से रस्से आदि बनते हैं । कहीं कहीं अकाल के दिनों में इसकी छाल आटे की एरह पीसकर खाई भी जाती है । लकड़ी से खेती के औजार छाजन की बल्लियाँ गाडियों के धुरे और बंदूक के कुंदे बनाए जाते हैं । यह पानी में जल्दी सड़ता नहीं । जंगली सूअर इसकी छाल बहुत मजे में खाते हैं, इसलिये शिकारी लोग उनका शिकार करने के लिये प्रायः इसका उपयोग करते हैं ।