कुबंड
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुबंड ^१पु संज्ञा पुं॰ [ सं॰ कोदण्ड, प्रा॰, पु॰ हिं॰ कोबंड] धनुष । उ॰— (क) कुबड कियो विविखंड महा बरवड प्रचंड भुजा बल ते ।— हनुमान ( शब्द॰) । (ख) भुसुंडिय और कुबंडिय साधि । परे दुहु ओरन तेभट आँधि । — सूदन (शब्द॰) ।
कुबंड ^२पु वि॰ [सं॰ कु + बण्ठ = खंज] खोंडा । विकृताँग । उ॰— हाँ जीति सुरेश महेश की पूत गणेश को दंत उपार लियो । यम के वश कै पुनि बाहन का जिन तोरि विषाण कुबड कियो ।— हनुमान (शब्द॰) ।