कुलफा
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुलफा ^१ संज्ञा पुं॰ [फा॰ खुर्फा़] एक साग जिसके पत्त दलदार, नीचे डंठल के पास नुकीले और सिर पर चौड़े होते हैं । विशेष—इसके पत्ते दो अगुल लंबे और डंठल में दो आमने सामने लगते हैं । इसके फूल पीले रंग के होते हैं । फूल झड़ जाने पर छोटे छोट कंगूरे निकलते हैं जिनमें काले गोल चिपढे दाने होते हैं । ये दाने बहुत छोटे होते हैं और दवा के काम में आते हैं । लोग ठंढाई में इन्हें प्रायः डालते हैं । इसका पौधा एक बालिश्त से डेढ़ बालिश्त तक ऊँचा है और ठेडी जगह में उगता है । यह बसंत ऋतु के पहले बोया जाता है और गरमी में तैयार होता है । इसका पौधा बहुत जल्द बढ़ता है । बरसात में यह आपसे आप खेतों में जमता है । लोग इसका साग खाते हैं । वैद्यक में यह ठंढा माना गया है । इसी की छोटी जाति को लोनी, अमलोनी या नोनिया कहते हैं । यौ॰—बृहल्लोणी । घोलिका ।
कुलफा ^२ पु † संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'कुलफ' । उ॰—चर्म दृष्टि का कुलफा दे के, चौरासी भरमाई हो ।—कबीर श॰, पृ॰ ६३ ।