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कुष्मांड़

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कुष्मांड़ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कुष्माण्ड]

१. कुम्हड़ा ।

२. एक प्रकार के देवता जो शिव के अनुचर हैं ।

३. जरायु । गर्भम्थली । पर्या॰—कुष्मांड़ नवमी = कार्तिक शुक्ल नबमी । इस दिन कु्म्हड़े में स्वर्ण आदि रखकर दान करते है ।