कुहौ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कुहौ पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कुहू या अनुर॰]
१. मोर या कोकिल की कूल । उ॰— बन वाटनु पिक बटपरा लखि बिरहिन मत मैं न । कुहो कुहौ कहि कहि उठै करि करि राते नैन ।— बिहारी र॰, दो॰, ४७५ ।