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कूँड़

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कूँड़ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कुणु]

१. सिर को बचाने के लिये लोहे की एक ऊँची टीपी॰ जिसे लड़ाई के समय पहनते थे । खोद उ॰— अँगरी पहिरि कूँड़ सिर धरही । फरसा बाँस सेल सम करहीं ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. चौगोशिया टोपी के आकार का मिटटी या लोहे का गह्वरा बरतन, जिसे ढेकुल में लगाकर सिंचाई के लिये कुएँ से पानी निकांलते हैं ।

३. वह गहरी लकीर जो खेत में हल जोतने से बन जाती है । कुंड़ ।

४. मिट्टी, ताँबे या पीतल आदि का बना हुआ लह गहरा पात्र जिसके ऊपर चमड़ा मढ़कर 'बायाँ' या ठेका बजाते है ।